इंदौर। मध्य प्रदेश में फसल बीमा क्लेम में कथित गड़बड़ी का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। देवास और धार जिले के किसानों के बीमा दावों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि करीब 944 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के कारण हजारों किसानों को उनका हक नहीं मिल पाया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कृषि बीमा कंपनी और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से किसानों को मिलने वाली बीमा राशि रोक दी गई। आरोप है कि इसके लिए फसल कटाई प्रयोग यानी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के आंकड़ों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया, जिससे बीमा दावों पर असर पड़ा।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर सीबीआई या फिर हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल यानी एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही देवास और धार जिले के लंबित और खारिज किए गए बीमा दावों का दोबारा मूल्यांकन कराया जाए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि पूरे मामले का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी से विशेष ऑडिट कराया जाए, ताकि यदि कोई वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आ सके। इसके अलावा प्रभावित किसानों को उनकी पूरी बकाया फसल बीमा राशि जल्द से जल्द दिलाने की भी मांग की गई है।
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। फिलहाल कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों और कृषि बीमा कंपनियों में हलचल तेज हो गई है, जबकि किसान अब हाईकोर्ट के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

