जमीन बचाने की लड़ाई तेज! कलेक्ट्रेट के बाहर किसानों का महाधरना, प्रशासन को दिया दाल-बाटी का न्योता, महिलाएं-बच्चे भी आंदोलन में शामिल

इंदौर। शहर में पूर्वी रिंग रोड और मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का आंदोलन अब और उग्र होता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट के बाहर गंजी कंपाउंड में धरने पर बैठ गए और अपनी जमीन बचाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने सड़क पर बैठकर विरोध जताया और परियोजनाओं को रद्द करने की मांग उठाई।

धरना स्थल पर सिर्फ पुरुष किसान ही नहीं, बल्कि महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलन को लंबा चलाने की तैयारी के साथ किसान अपने साथ राशन, बर्तन और खाना बनाने का सामान लेकर पहुंचे। विरोध के बीच किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों को दाल-बाटी खाने का न्योता भी दिया और कहा कि अधिकारी धरना स्थल पर आकर उनकी समस्याएं समझें और उनसे सीधे संवाद करें।

किसानों का आरोप है कि पूर्वी रिंग रोड और मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजना के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। उनका कहना है कि खेती ही उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है और जमीन छिनने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों का दावा है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के सामने अपनी आपत्तियां और मांगें रखीं, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया।

धरने पर बैठे किसानों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए हर संभव संघर्ष करेंगे। उनका कहना है कि जब तक कलेक्टर स्वयं आकर उनसे बातचीत नहीं करते और कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।

स्थिति को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल भी तैनात किया गया है। फिलहाल किसानों का धरना लगातार जारी है और अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किसानों और प्रशासन के बीच चल रहा यह गतिरोध आखिर किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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