ग्वालियर। ग्वालियर में हर साल बारिश के साथ सामने आने वाली जलभराव की समस्या अब हाईकोर्ट की निगरानी में पहुंच गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर नगर निगम से तीखे सवाल पूछे हैं और साफ जानना चाहा है कि क्या निगम यह गारंटी दे सकता है कि शहर में अब जलभराव नहीं होगा?
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगम ने दावा किया कि शहर के 236 चिन्हित जलभराव वाले स्थानों में से 109 जगहों पर सुधार कार्य किए जा चुके हैं। लेकिन जैसे ही कोर्ट ने पूछा कि क्या इन कार्यों के बाद अब इन इलाकों में किसी भी स्थिति में पानी नहीं भरेगा, तो नगर निगम ने स्वीकार किया कि वह ऐसी कोई गारंटी नहीं दे सकता।
कोर्ट ने इस जवाब पर स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि नगर निगम के दावों की असली परीक्षा तो बारिश के दौरान ही होगी। केवल कागजों पर किए गए दावे और रिपोर्टें पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जनता को जमीनी स्तर पर राहत मिलनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम से अमृत और स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत प्राप्त राशि, उसके खर्च का पूरा विवरण, बिछाई गई नई सीवर लाइनों की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता की जानकारी भी मांगी है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि संवेदनशील इलाकों में जलभराव रोकने के लिए आखिर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
नगर निगम ने अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई निर्धारित की है।
गौरतलब है कि ग्वालियर में हर मानसून के दौरान आनंद नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, पड़ाव चौराहा, महाराज बाड़ा, जीवाजी चौक, फूलबाग, हजीरा और मुरार समेत कई इलाके जलभराव से प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में अब शहरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार बारिश में नगर निगम के दावे कितने खरे उतरते हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट ने साफ संदेश दे दिया है कि जलभराव जैसे गंभीर मुद्दे पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि परिणाम दिखाने होंगे।

