भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर हाईकोर्ट द्वारा केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर डॉ. मोहन यादव सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और आज शिक्षा व्यवस्था खुद हाईकोर्ट के कटघरे में खड़ी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और अपने बयान के जरिए उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री, यह केवल शिक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के भविष्य के साथ किया गया सबसे बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब सरकार से जवाब मांगने के लिए हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। सिंघार ने कहा कि बच्चों का भविष्य बड़े-बड़े विज्ञापनों से नहीं, बल्कि शिक्षकों की भर्ती, बेहतर स्कूलों और जवाबदेह सरकार से बनता है, लेकिन भाजपा सरकार ने इन तीनों को ही नजरअंदाज कर दिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर कई आंकड़े भी सामने रखे। उनके मुताबिक प्रदेश में शिक्षकों के 2 लाख 89 हजार स्वीकृत पदों में से 1 लाख 15 हजार 678 पद खाली हैं। 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है। करीब 5 हजार स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं और आधुनिक दौर में भी लगभग 59 हजार सरकारी स्कूल कंप्यूटर जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
उमंग सिंघार ने यह भी दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था की इसी बदहाली का परिणाम है कि पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22 लाख 3 हजार से अधिक छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी या दूसरे संस्थानों का रुख कर लिया। उन्होंने कहा कि लोग मजबूरी में अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से हटाने पर विवश हो रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को गंभीर मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। इसके बाद यह मुद्दा अब शिक्षा से आगे बढ़कर प्रदेश की राजनीति का भी बड़ा विषय बन गया है।

