पूर्वजों की जमीन गई, न नौकरी मिली न पूरा मुआवजा, खदान में धरने पर बैठे आदिवासी किसान

शहडोल। शहडोल जिले में एक बार फिर जमीन अधिग्रहण का मामला गरमा गया है। विकास और किसानों के हितों के दावों के बीच अब आदिवासी किसान अपने हक के लिए खदान में धरने पर बैठ गए हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार और कंपनी ने उनकी जमीन तो ले ली, लेकिन आज तक किए गए वादे पूरे नहीं किए गए।

मामला South Eastern Coalfields Limited के सोहागपुर एरिया में आने वाले रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि कई साल पहले डोंगरी टोला क्षेत्र के 50 से अधिक आदिवासी किसानों की कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। उस समय किसानों को मुआवजा और नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था।

लेकिन किसानों का कहना है कि आज भी कई परिवार अपने अधिकारों से वंचित हैं। प्रभावित किसानों में नर्बदा राठौर, हरिलाल, शाह राठौर, राम कुमार, चंदा बाई, राजेश और भुल्ली बैगा जैसे नाम शामिल हैं। उनका आरोप है कि उनकी पूर्वजों की उपजाऊ जमीन छिन गई, लेकिन बदले में न पूरा मुआवजा मिला और न रोजगार।

किसानों ने खदान में काम कर रही निजी कंपनी ‘जय अम्बे’ पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी उन्हीं की जमीन पर उत्खनन कर रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार तक नहीं दिया जा रहा।

अपनी मांगों को लेकर अब ग्रामीणों ने खदान परिसर में ही आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदर्शन का असर उत्पादन पर भी साफ दिखाई देने लगा है और कंपनी का काम पूरी तरह ठप होने की बात सामने आ रही है।

बताया जा रहा है कि काम रुकने से लाखों रुपये के नुकसान की स्थिति बन गई है। वहीं इलाके में तनाव बढ़ने के बाद प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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