जलती चिता से मांस खाने के कथित वीडियो के बाद काली नंद गिरी के पुराने विवाद चर्चा में! अघोर अखाड़े ने SP से की कार्रवाई की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्मशान घाट से सामने आए जलती चिता से मानव मांस खाने के कथित वीडियो ने पहले ही सनसनी मचा रखी है। अब इस मामले में चर्चा में आई काली नंद गिरी को लेकर पुराने विवाद और दावे भी सामने आने लगे हैं।

अघोर अखाड़े के पीठाधीश्वर एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष और नाथ संप्रदाय के बालयोगी विष्णुनाथजी खड़ेश्वरी अघोरी बाबा ने काली नंद गिरी को लेकर उज्जैन के पुलिस अधीक्षक को पत्र सौंपा है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और कार्रवाई की मांग की है।

विष्णुनाथजी खड़ेश्वरी अघोरी बाबा ने वायरल वीडियो की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से उज्जैन की धार्मिक और आध्यात्मिक छवि प्रभावित होती है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

अपने आवेदन के साथ उन्होंने काली नंद गिरी से जुड़े बताए जा रहे कुछ पुराने फोटो और वीडियो भी पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस इन फोटो-वीडियो और उनसे जुड़े दावों की जांच कर रही है।

इसी बीच विष्णुनाथ महाराज की ओर से काली नंद गिरी की पहचान और पुराने जीवन को लेकर भी कुछ दावे किए गए हैं। उनका दावा है कि काली नंद गिरी पहले पुरुष थी और उसकी पहचान अल्लूरी श्रीनिवास के नाम से थी। इसके बाद जेंडर परिवर्तन कराने और किन्नर के रूप में पहचान बनाने का भी दावा किया गया है।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के नाम से पहचान बनाने और तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश में भी विवादों से जुड़े होने के दावे सामने आए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो-वीडियो तथा अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

वहीं उज्जैन के श्मशान घाट में जलती चिता से मानव मांस खाने के कथित वीडियो के मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने काली नंद गिरी के खिलाफ BNS की धारा 301 के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी की थी। न्यायालय ने उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

अब इस पूरे मामले में दो स्तर पर जांच चल रही है। एक तरफ वायरल वीडियो और उससे जुड़े आरोपों की कानूनी जांच हो रही है, तो दूसरी तरफ काली नंद गिरी के पुराने फोटो, वीडियो और उसके अतीत को लेकर लगाए जा रहे दावों की पड़ताल की जा रही है।

फिलहाल काली नंद गिरी की पहचान, जेंडर परिवर्तन और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश से जुड़े पुराने विवादों को लेकर सामने आए दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इनकी पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और न्यायालयीन अभिलेखों से होना बाकी है।

ऐसे में अब सबकी नजर पुलिस की जांच पर है कि पुराने फोटो-वीडियो और सामने आए दावों की पड़ताल के बाद इस पूरे मामले में क्या सच्चाई सामने आती है।

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