700 ग्राम आवेदनों का दर्द लेकर जनसुनवाई पहुंचीं पार्षद, मुक्तिधाम की सड़क के लिए चार साल से जारी है संघर्ष

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले से जनसुनवाई का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां नगर निगम के वार्ड क्रमांक 17 की महिला पार्षद ऊषा गंगा कुशवाहा अपनी समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए तराजू लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों के सामने वर्षों से दिए गए आवेदनों का वजन कराया और बताया कि मुक्तिधाम जाने वाले रास्ते से अतिक्रमण हटाने की मांग करते-करते अब उनके आवेदनों का वजन करीब 700 ग्राम तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पार्षद ने कहा कि वह यह भी नहीं गिन सकतीं कि इस मुद्दे को लेकर कितने आवेदन प्रशासन को सौंप चुकी हैं। इसलिए उन्होंने आवेदनों की संख्या के बजाय उनका वजन बताने का फैसला किया। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद मुक्तिधाम तक जाने वाले आम रास्ते से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्षद ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गईं। इस दौरान उनके पति गंगा कुशवाहा ने भी प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से लगातार आवेदन और निवेदन किए जा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। जमीन पर अब तक कोई कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

कलेक्टर को संबोधित अपने पत्र में पार्षद ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के पास स्थित मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले मार्ग पर दो लोगों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है। इस वजह से अंतिम संस्कार के लिए आने-जाने वाले लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने एक दर्दनाक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें 15 नवंबर 2025 को एक आदिवासी परिवार की महिला की मृत्यु होने के बाद मुक्तिधाम तक रास्ता नहीं होने के कारण मोहल्ले के बीच ही अंतिम संस्कार करना पड़ा था।

पार्षद का आरोप है कि इस घटना के बाद प्रशासन ने स्थल निरीक्षण तो किया, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा केवल औपचारिकताएं निभाई गईं, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है। उनके अनुसार, प्रशासनिक आदेश और निर्देश कागजों तक सीमित रह गए हैं।

पार्षद ऊषा गंगा कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी प्रकार की धमकी नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की पीड़ा को सामने लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब लोकतंत्र में जनता की जायज मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब धरना-प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार बन जाता है। उनका संघर्ष किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि वार्डवासियों को मुक्तिधाम तक निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराने के लिए है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मुक्तिधाम जाने वाले आम मार्ग से जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वह कलेक्ट्रेट के सामने धरना देने के लिए मजबूर होंगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनसमस्याओं के समाधान की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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