मऊगंज। मध्यप्रदेश के नवगठित Mauganj जिले से विकास के दावों की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। ग्राम पंचायत हाटा के कोढबा और जिल्की टोला के आदिवासी और यादव परिवार आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीण पिछले करीब 30 सालों से नदी किनारे गड्ढा खोदकर मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं।
भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच जब ग्रामीणों ने अपनी समस्या मीडिया के सामने रखी, तो पीएचई विभाग ने कागजों में दावा कर दिया कि गांव में पानी की कोई कमी नहीं है। इस कथित सरकारी रिपोर्ट से नाराज ग्रामीण खाली डिब्बे लेकर 55 किलोमीटर दूर कलेक्टर कार्यालय और फिर कलेक्टर निवास पहुंच गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिल्की टोला में लोग आज भी नदी किनारे बने गड्ढों से गंदा पानी छानकर पीते हैं। यही पानी मवेशियों के इस्तेमाल में भी आता है। गर्मी बढ़ते ही गांव में पानी का संकट इतना गहरा जाता है कि लोगों को पलायन तक करना पड़ता है।
वहीं कोढबा टोला में 20 से ज्यादा परिवार एक खराब हैंडपंप के सहारे जिंदगी गुजार रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चार घंटे इंतजार करने पर सिर्फ 8 बाल्टी पानी निकलता है। सुबह चार बजे से लाइन लग जाती है, लेकिन शाम तक भी कई परिवारों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग ने बिना सही जांच के रिपोर्ट तैयार कर दी। कागजों में दावा किया गया कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत काम चल रहा है और 8 इंच का बोर चालू है, जबकि हकीकत यह है कि उस बोर में आज तक मोटर तक नहीं डाली गई।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी गांव पहुंचे जरूर, लेकिन गाड़ी से उतरे तक नहीं और एक रसूखदार व्यक्ति के घर बैठकर पंचनामा तैयार कर दिया। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि अगर रिपोर्ट सही थी तो शिकायत करने वाले आदिवासियों के हस्ताक्षर उस पंचनामे में क्यों नहीं हैं।
शनिवार को जब ग्रामीण न्याय की मांग लेकर मऊगंज कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो वहां कलेक्टर मौजूद नहीं मिले। इसके बाद ग्रामीण सीधे कलेक्टर निवास पहुंच गए और खाली डिब्बे लेकर गेट पर बैठ गए। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आवेदन लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में सचमुच पानी होता, तो वे अपना घर छोड़कर 55 किलोमीटर दूर खाली डिब्बे लेकर न्याय मांगने नहीं आते। लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या वे उन तस्वीरों और वीडियो को झुठला सकते हैं, जिनमें बुजुर्ग साइकिलों पर पानी ढोते नजर आ रहे हैं।

