ग्वालियर। ग्वालियर की खराब सड़कों और उनकी गुणवत्ता जांच से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामला सड़क नंबर 7 का है, जो बेटी बचाओ चौराहे से गुढ़ा-गुड़ी नाका तक जाती है। इस सड़क की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए जाने थे, लेकिन उससे पहले ही सड़क की खुदाई और मरम्मत शुरू करा दी गई।
सैंपलिंग तय होने के बाद अचानक शुरू हुई मरम्मत
बताया जा रहा है कि यह सड़क करीब एक साल से खराब हालत में थी। हाईकोर्ट में खराब सड़कों की गुणवत्ता जांच के दौरान सड़क नंबर 7 की सैंपलिंग प्रस्तावित थी। इसी बीच नगर निगम ने अचानक सड़क की खुदाई और मरम्मत का काम शुरू करा दिया।
इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब सड़क लंबे समय से खराब पड़ी थी, तो सैंपलिंग तय होने के बाद ही अचानक मरम्मत क्यों शुरू कर दी गई।
जांच में पारदर्शिता के निर्देश
हाईकोर्ट ने सड़क की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सैंपलिंग के दौरान फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाए और पूरी जांच प्रक्रिया को रिकॉर्ड में रखा जाए।
वहीं मामले में एक लैब संचालक ने दबाव का हवाला देते हुए सड़क की जांच करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद नगर निगम के वकील के आग्रह पर सड़क नंबर 7 की सैंपलिंग 19 अगस्त की जगह 20 अगस्त को कराने की अनुमति दी गई थी।
मोबाइल पर आदेश के बाद मरम्मत, कोर्ट ने अनुमति की निरस्त
लेकिन इसके बाद निगमायुक्त संघ प्रिय की ओर से मोबाइल और व्हाट्सऐप के जरिए सड़क की अचानक मरम्मत कराए जाने की जानकारी सामने आई। हाईकोर्ट ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया और पहले दी गई सैंपलिंग की अनुमति को निरस्त कर दिया।
अब सड़क के सैंपल 19 अगस्त को ही लिए जाएंगे। साथ ही निगमायुक्त संघ प्रिय को मोबाइल के साथ कोर्ट में तलब किया गया है।
अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। सड़क की खुदाई, अचानक हुई मरम्मत और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को लेकर कोर्ट क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

