मऊगंज। मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सुशासन के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जिला पंचायत और कलेक्ट्रेट की इमारत बनाने के नाम पर प्रशासन ने उन आदिवासी परिवारों के घर उजाड़ दिए, जो पिछले करीब 50 सालों से वहां रह रहे थे, हैरानी की बात यह रही कि बुलडोजर उन घरों पर भी चला दिए गए जिन्हें खुद सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मंजूरी मिली थी।
बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर 11 में अतिक्रमण हटाने के नाम पर हाल ही में सात आदिवासी परिवारों को बेघर कर दिया गया, इन परिवारों का दावा है कि उनके पास 1984 के भू-अधिकार पट्टे मौजूद हैं, लेकिन विकास की इस कार्रवाई में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई, हालात इतने खराब थे कि लोगों को अपना सामान तक समेटने का मौका नहीं मिला और उनकी पूरी गृहस्थी मलबे में दब गई।
कार्रवाई के बाद ये परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए, इसी बीच मौसम ने भी कहर बरपाया, जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो तेज आंधी और ओलों की बारिश शुरू हो गई, एक तरफ अफसर अपनी गाड़ियों में छिपते नजर आए, वहीं दूसरी ओर बेघर हुए बच्चे मलबे के बीच भीगते और सिसकते रहे, यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था।
घटना की खबर मिलते ही पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना मौके पर पहुंचे और कलेक्टर के काफिले को घेर लिया, उन्होंने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकारी खुद दो मिनट की बारिश नहीं झेल पा रहे, तो जिन मासूमों के घर तोड़े गए हैं, वे इस हालात में कहां जाएंगे, इसके बाद गुस्साए आदिवासी सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंच गए और अपने पुराने पट्टों के साथ सभागार में घुसकर प्रदर्शन करने लगे।
कलेक्ट्रेट में आदिवासियों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उन्हें रहने के लिए वैकल्पिक जमीन और घर नहीं दिए जाएंगे, वे पीछे नहीं हटेंगे, पूर्व विधायक ने भी प्रशासन पर आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों की जमीन बचाने के लिए गरीबों को उजाड़ा जा रहा है।
बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कलेक्टर संजय जैन ने तत्काल राहत का भरोसा दिया है, उन्होंने कहा कि 125 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा, उन्हें नए पट्टे दिए जाएंगे और प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जल्द जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, अब देखने वाली बात यह होगी कि यह आश्वासन कब तक हकीकत में बदलता है।

