भोपाल। मध्य प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के बड़े-बड़े दावों के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा अब सियासी बहस का विषय बन गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिं्घार ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश के करीब 1 लाख 22 हजार स्कूलों में से 1 लाख 21 हजार स्कूल ऐसे हैं जहां खेल शिक्षक ही नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बच्चों को खेलों की बुनियादी ट्रेनिंग देने वाला कोई नहीं होगा, तो प्रदेश से नई खेल प्रतिभाएं कैसे तैयार होंगी।
उमंग सिं्घार ने राजधानी भोपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां 991 सरकारी स्कूल संचालित हैं, लेकिन इनमें केवल 5 खेल शिक्षक पदस्थ हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे साफ जाहिर होता है कि खेल शिक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं। उन्होंने खेल मंत्री विश्वास सारंग से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है और पूछा है कि आखिर प्रदेश के लाखों बच्चों को खेलों की बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित रखा जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार खेल आयोजनों और उपलब्धियों का प्रचार करने में तो आगे रहती है, लेकिन जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने की व्यवस्था पूरी तरह कमजोर है। उनका कहना है कि खेल शिक्षक न होने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों प्रतिभाशाली बच्चे आगे बढ़ने का मौका खो रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक कमी नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है।
इस मुद्दे को लेकर खेल प्रेमियों और अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि स्कूलों में खेल शिक्षक ही नहीं होंगे तो बच्चों को सही मार्गदर्शन कैसे मिलेगा और खेल संस्कृति कैसे विकसित होगी। अब प्रदेश की जनता और छात्र यह जानना चाहते हैं कि सरकार इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाने जा रही है और कब तक स्कूलों में खेल शिक्षकों की नियुक्ति होगी।

